Food Processing Technology in Hindi

Food Processing Industry in India in Hindi

परिचय

फ़ूड टेक्नोलॉजी फ़ूड साइंस की एक ऐसी शाखा है जिसमे कच्चे खाद्य पदार्थो को विभिन प्रक्रियाओं के द्वारा लम्बे समय तक खाने योग्य बनाया जाता है| फ़ूड टेक्नोलॉजी में विभिन प्रक्रियाओं को सम्मिलित कर के खाने को लम्बे समय तक खाने योग्य सुरक्षित रखना, पदार्थो को खूबसूरती प्रदान करना एवं उन्हें सेहत के लिए उपयोगी बनाना है|इसके लिए खाद्य पदार्थो पर अनुसन्धान,  नए विनिर्माण उत्पादन एवं सुरक्षित रखना फ़ूड टेक्नोलॉजी का हिस्सा है| (food processing technology in hindi)

इस शाखा के अंतर्गत किये गए अनुसन्धान एवं विभिन प्रकार के उत्पादन का नतीजा है की  बाजार अनगिनित उत्पादों से भरे पढ़े है| हर कंपनी अपने उत्पादों को बाजार में उतारने से पहले इतने अनुसन्धान करती है की जब उत्पाद बाजार में आये तो उसका मानव जीवन पर कोई दुष्प्रभाव ना हो| यह तकनीक खाने के स्वाद का स्वछता का विभिन प्रकार के फ़ूड आइटम के प्रोसेसिंग के बारे में बताती है| यह तकनीक खाद्य पदार्थो को बनाने के लिए उपयोग में ली जाने वाली मशीने, उनकी कार्य करने की पद्धति, प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों उनकी स्पेसिफिकेशन आदि के बारे में जानकारी देती है|

यह शाखा रसायन शास्त्र, जीव विज्ञानं, सुक्ष्म जीव विज्ञान, पोषाहार, स्वाद विज्ञान एवं विभिन प्रकार की पैकजिंग को सम्भिलित कर के बनाई गई है| इन सब का सम्भिलित रूप ही इसे एक संपूर्ण खाद्य पदार्थो को बनाने में उपयोग में ली जाने वाली तकनीक की गाइड के रूप में देखि जाती है फ़ूड टेक्नोलॉजी विश्व में सबसे ज्यादा उपयोग में ली जाने वाली ब्रांच है| विश्व की  यु ऐन संस्था के अनुसार भारत में २५- ३० प्रतिशत खाद्य उत्पात कृषि भूमि पर ही उपशिष्ट हो जाते है क्युकी इनके सुरक्षित रखने एवं संघरक्षां की उचित व्यवस्था ही नहीं है| एक अनुमान के अनुसार करीब ६०  हज़ार करोड़ की उपयोग युक्त खाद्य सामग्री व्यर्थ चली जाती है| एक और बाजार के अनुमान के अनुसार खाद्य सामाज्ञी का बाजार २०-३० प्रतिशत की वृद्धिदर से बढ़ रहा है जो की किसी भी क्षेत्र की वृद्धिदर से बहुत ज्यादा है| अगर खाद्य तकनीक का प्रयोग कर के इस अपशिष्ट खाद्य सामग्री को बचा कर एवं वृद्धिदर को संयोजित कर किसानो को उनकी लगत का उचित मूल्य प्राप्त कराया जा सकता है| इन सब को देखते हुए फ़ूड टेक्नोलॉजी अत्यधिक सम्भावना से भरपूर है|

फ़ूड टेक्नोलॉजी के लाभ

फ़ूड टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ ना केवल फ़ूड टेक्नोलॉजी के जानकार होते है बल्कि अपनी जरुरत को दूसरे विशेषज्ञों को अच्छी तरह से समझा कर नयी एवं बेहतरीन तकनीक एवं मशीने बनवा सकते है| इसके विशेषज्ञों को अपने उत्पाद के बारे में इतनी जानकारी होती है की वह कब और कहा किस स्पेसिफिकेशन के कच्चे पदार्थ का उपयोग कर के बेहतरीन उत्पाद एवं कीमत प्राप्त कर सकते है| फ़ूड टेक्नोलॉजी में मशीनो के बारे में पूर्ण जानकारी एवं उनके पैकिंग के तरीके प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए उपयोग में लेने की वजह से एक सम्पूर्ण उत्पाद बनाने में सहायता मिलती है| इस समय भारत में फ़ास्ट मूविंग कंस्यूमर गुड्स सेक्टर में ज्यादातर अंतर्राष्ट्रीय कम्पनिया का दबदबा बना हुआ है। इसकी वजह से देशी और छोटी कम्पनीज को बाजार में अपने उत्पादों के लिए बहुत प्रयास करने पड़ते हैं| बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कम्पनीज नुकसान उठाकर भी बाजार पर कब्ज्जा कर लेती हैं और छोटी कम्पनीज को बाजार से हटना पड़ता है| अंतर्राष्ट्रीय कम्पनीज से प्रतियोगिता करने का सिर्फ एक ही तरीका है की उत्पाद का स्वाद, खूबसूरती और पैकेजिंग इतनी अच्छी हो की वह अंतर्राष्ट्रीए कम्पनीज के मुकाबले में बराबरी कर सके और कम कीमत में उनकी बाजार से हिसेदारी कम की जा सके| इस कारन से इस खेत्र में इतनी ज्यादा सम्भाना है की जो भी इस खेत्र में आना चाहता है उसे बहुत अच्छी सम्भवना के साथ आना चाहिए| इस क्षेत्र में कुछ प्रमुख बहुराष्ट्रीय कम्पनीज इस प्रकार हैं |

क्रम संख्या कंपनी का छोटा नाम कंपनी के उत्पाद
1 पेप्सी फ्रिटो लैस लैस चिप्स, अंकल चिप्स, लहर नमकीन, शीतल पेय, कुरकुरे, पानी, सोडा, के ऐफ सी फ़ूड चैन  पिज़्ज़ा हट
2 कोका कोला शीतल पेय, पानी, मिनट मेड
3 यूनि लीवर किसान प्रोडक्ट्स , नार के प्रोडक्ट, आइस क्रीम, प्योर इट,
4 कैडबरी चॉक्लेट, हेल्थ ड्रिंक्स, बॉर्न्विटा, इत्यादि
5 ग्लैक्सो स्मिथ क्लीन हॉर्लिक्स, डेयरी प्रोडक्ट्स
6. नेस्ले चॉक्लेट, हेल्थ ड्रिंक्स , मैग्गी, माइलो इत्यादि
7 हर्बल लाइफ हेल्थ ड्रिंक्स
8 कारगिल खाद्य तेल
9. बुंगे खाद्य तेल

 

इस क्षेत्र की बड़ी भारतीय कम्पनिया

क्रम संख्या कंपनी का छोटा नाम कंपनी के उत्पाद
1. डाबर फ्रूट जूस, शहद, च्यवनप्राश
2. अमूल डेयरी प्रोडूसत्स
3. पार्ले बिस्किट्स, चिप्स, चॉक्लेट्स इत्यादि
4. ब्रिटानिया बिस्किट्स, बेकरी प्रोडक्ट्स इत्यादि
5. पातंजलि विभिन खाद्य पदार्थ

 

भारत से फ़ूड प्रोडक्ट का निर्यात कुल निर्यात का १४ प्रतिशत के आस पास है और भारत से खाद्य पदार्थो का निर्यात किया गया सामान जैसे आम, नमकीन, एवं कई अन्य उत्पादो को  उपयोग योग्य नहीं होने के कारन रोक लगा दी गई है जो की फ़ूड इंडस्ट्री के लिए बुरी खबर है| यह सब अंतर्राष्ट्रीय नियमो एवं स्पेसिफिकेशन की जानकारी के आभाव में हुआ है| इन सबको ध्यान में रख कर फ़ूड टेक्नोलॉजी की उपयोगिता बहुत बढ़ जाती है| विश्व बाजार और भारतीय बाजार में संरक्षक का उपयोग बंद करने का दबाव बढ़ता जा रहा है और फ़ूड तकनीक में नए तरीके अपनाने का एवं शुद्ध , बेहतर, स्वादिष्ट खाने की मांग बढ़ने लगी है| इसके साथ सरकार भी इस तरह के नियम बनाने में लगी है की समस्त जनजाति बेहतर स्वतः खाद्य पदार्थो का उपयोग कर स्वतः जीवन व्यतीत करे|

फ़ूड टेक्नोलॉजी की व्यापकता

फ़ूड टेक्नोलॉजी हर क्षेत्र में हावी होती हुई विज्ञानं एवं तकनीक की शाखा है| इसके अंतर्गत मनुष्य के खाने योग्य पदार्थ आते है| इसके अंतर्गत विभिन प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाने की फैक्ट्री आती है|

१. डेरी एवं डेरी प्रोडक्ट                             २. खाद्य तेल

३. शकर मिल                                     ४. दाल मिल

५. चावल मिल                                          ६. आटा एवं बेसन मिल

७. आलू के उत्पाद बनाने का कारखाना                 ८. नमकीन बनाने का कारखाना

९. मिठाई बनाने का कारखाना                        १०. डब्बा बंद खाना

११. मीट फैक्ट्री                                    १२. पोल्ट्री एवं पोल्ट्री उत्पाद

१३. अचार                                        १४. माल्ट

१५. बेकरी                                        १६. मछली

१७. फ्रोजेन फूड्स                                  १८. माइक्रोवेव कुक्ड फ़ूड

१९. मसाले                                       २०. नमक

२१. टमाटर उत्पाद                                 २२. फलो का रास

२३. शहद                                         २४. हेल्थ प्रोडक्ट्स

२५. बिस्किट्स                                     २६. पानी

२७. सॉफ्ट ड्रिंक्स                                   २८. हेल्थ फ़ूड फॉर स्पोर्ट्स पर्सन

फ़ूड टेक्नोलॉजी के घटक

फ़ूड टेक्नोलॉजी के घटक इस प्रकार है

  • १. खाद्य पदार्थ के गुणवत्ता फैक्टर
  • २. अप्पेअरन्स  फैक्टर
  • ३. टेक्चरल फैक्टर
  • ४. स्वाद फैक्टर
  • ५. ताप संरक्षण
  • ६. कच्चे माल का गुणवत्ता फैक्टर
  • ७. शीत संरक्षण
  • ८. खाद्य निर्जलीकरन एवं उनका संकेन्द्रण
  • ९. खाद्य क्षय  नियंत्रण
  • १०. खाद्य सुरक्षा जोखिम एवं खाद्य पदार्थो से होने वाले खतरों की पहचान

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फ़ूड टेक्नोलॉजी में प्रयुक्त कारखानों का विवरण

१. डेयरी इंडस्ट्री :

डेयरी इंडस्ट्री में दूध को विभिन प्रोडक्ट्स में बदलने का काम होता है| डेरी को दूध उपलब्ध करने का काम ग्वालो के द्वारा किया जाता है एवं उसे विभिन केन्द्रो पर शीतल कर के टैंकरों से डेयरी में भेजा जाता है जहा उसे विभिन प्रकार के प्रोडक्ट्स बनाये जाते है| थैली बंध दूध के लिए ठन्डे दूध को ८० डिग्री तक कुछ सेकण्ड्स के लिए गरम कर के तुरंत ४ डिग्री पर ठंडा कर दिया जाता है| इस क्रिया को पासचरराइजिंग कहलाता है जिससे दूध में उपस्थित ज्यादातर सुक्ष्म जीवाणु ख़तम हो जाते है और दूध को फ्रीज में लम्बे समय तक रखा जा सकता है| नयी तकनीक के द्वारा यह तापमान ८० डिग्री के बजाय १२० डिग्री तक ले जाते है जिससे दूध में उपस्थित सभी जीवाणु ख़तम हो जाते है और दूध सामान्य तापमान पर कई   दिन तक उपयोग करने लायक बना रहता है|

दूध की विभिन श्रेणियों को बनाने के लिए दूध में से क्रीम को कम या ज्यादा किया जाता है और फुल क्रीम, टोंड मिल्क, हाफ टोंड मिल इत्यादि बनाये जाते है| बची हुई क्रीम से घी, माखन इत्यादि बनाये जाते है| घी बनाने के लिए क्रीम को चर्न किया जाता है और फिर गरम कर के घी बना लिया जाता है|  सुगन्धित दूध बनाने के लिए इसमें विभिन प्रकार की कृतिम खुश्बुओ का सम्मिश्रण किया जाता है|

आइस क्रीम बनाने के लिए क्रीम में विभिन कृतिम खुशबू, झाग बनाने में प्रयुक्त होने वाले केमिकल मिलाये जाते है और फिर उनको मिक्स कर के -१५ डिग्री पर ठंढा किया जाता है| झाग बनाने वाले केमिकल डालने से आइसक्रीम कम ठंढी लगती है एवं उसका आयतन बढ़ जाता है|

दही बनाने के लिए दूध में विशेष कल्चर का प्रयोग किया जाता है जिससे वो जल्दी खट्टा ना हो और उसका लम्बे समय तक उपयोग किया जा सके| दही बनाने के लिए दूध को ४५ डिग्री पे गरम किया जाता है फिर उसमे कल्चर मिक्स कर के डब्बो में बंद कर दिए जाता है| इसके बाद चार घंटे के लिए इनक्यूबेटर में रख दिए जाता है| जब दही तैयार हो जाता है तो उसे कोल्ड स्टोर में रख दिया जाता है| ठन्डे दही को ही बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है|लस्सी एवं छाछ को बनाने के लिए दही को शुद्ध पानी में फार्मूलेशन के हिसाब से दही मिलाया जाता है| उसके बाद दही और पानी को अच्छी मिलाया जाता है एवं संक्रमण से बचने के लिए पासचरराइज किया जाता है| पासचरराइज करने की वजह से छाछ लस्सी ज्यादा लम्बे समय तक ख़राब नही होती है और खान योग्य बनी रहती है| लस्सी में विभिन प्रकार के कृतिम खुशबू, नमक या शक्कर मिला कर स्वादिष्ट बनाई जाती है|

दूध एवं दुग्ध प्रोडक्ट को पैक करने के लिए मल्टीलेयर पॉलीफिल्म काम में ली जाती है|

मसाला फैक्ट्री:

मसाला फैक्ट्री में विभिन मसलो में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को सीधे खेतो से खरीद कर भंडार कर लिया जाता है| फिर बाजार की जरुरत के हिसाब से विभिन मसालों को मिला कर सीधे उपयोग में लेने लायक बनाया जाता है| मसाला फैक्ट्री में प्रयुक्त होने वाली मशीनो को पलवराइज़र कहते है| पलवराइज़र साबूत मसलो को पाउडर फॉर्म में बदल देते है एवं फार्मूलेशन के हिसाब से विभिन मसलो को मिक्सर में मिला कर घुमा देते है| जब यह तैयार हो जाते है तो उन्हें पैक कर के बाजार में बेच दिए जाता है| उसमे प्रयुक्त होने वाली पैकेजिंग फिल्म मेटलाइज़्ड बीऔपिपि फिल्म होती है| इसको प्रिंटेड कार्डबोर्ड के डब्बो में बंद कर के बाजार में बच दिए जाते है| मसाला फैक्ट्री में हवा का प्रदुषण होता है उसको रोकने के लिए विभिन प्रकार के बैग फ़िल्टर लगाए जाते है|

आटा चक्की

आटा चक्की में प्रयुक्त होने वाले गेहू को विभिन मशीनो से पहले साफ़ किया जाता है फिर ग्रेडेशन मशीन से गेहू का या दाल का ग्रेडेशन किया जाता है जिससे छोटे बेकार उनुप्युक्त गेहू अलग हो जाते है| उच्च क्वालिटी गेहू को विभिन प्रकार के पलवराइज़र से आटे में बदल दिए जाता है| आटे में से बहुत बड़े एवं महीन आटे को अलग कर के सही क्वालिटी का आटा पैक कर दिए जाता है| महीन आटे को मैदा के रूप में बेच दिए जाता है एवं मोटे आटे को वापस गेहू में मिला कर पीस दिया जाता है| आटे को पैक करने के लिए मल्टीलेयर फिल्म का उपयोग किया जाता है जिससे उसकी शेल्फ लाइफ बानी रहती है|

नमक:

नमक बनाने के लिए समुद्र के पानी को सोलर पोंड में डाल कर कंसन्ट्रेट किया जाता है एवं रॉ नमक प्राप्त किया जाता है| इस रॉ नमक को ट्रको से नमक फैक्ट्री में भेज दिए जाता है|

इस नमक को दुबारा पानी में मिला कर नमक का पानी बनाया जाता है और फिर विभिन फिल्ट्रो के द्वारा साफ़ किया जाता है| जब उसमे से मिट्ठी एवं अनावश्यक पदार्थ छन जाते है तो पानी को वैक्यूम लगा कर निकल दिए जाता है| इस प्रोसेस को वैक्यूम डिस्टिलेशन कहते है| शुद्ध प्राप्त नमक को सेंट्रीफ्यूज के द्वारा पानी निकाल कर ड्राई कर लिए जाता है| फिर पलवराइज़र के द्वारा इसे पाउडर बना दिए जाता है| पलवराइज़र में नमक का कण का परिमाण बहुत महत्वपूर्ण होता है| इसके काम या ज्यादा होने से इसकी फ्लो प्रॉपर्टी बदल जाती है| सही कण का माप होने से नमक के पिंड नहीं बनते है| बारीक़ कण होने से पिंड बन जाते है एवं ज्यादा मोटे कण होने से नमक दानी में से निकलते वक़्त फस जाता है| कैच मसाले वालो को इसमें महारत हासिल है और अब सब उत्पादक इसका ख्याल रखते है| नमक को पैक करने के पहले सरकारी नियमि के हिसाब से आयोडाइड मिला दिए जाता है|

मीट:

मीट प्रोसेसिंग फैक्ट्री में दो तरह की प्रक्रिया होती है|

१. बूचड़ खाने

२. मीट प्रोसेस करने की प्रक्रिया

१. बूचड़ खाने: बूचड़ खाने में जानवरो को लाया जाता है और पशु चिकित्षक उनकी सेहत के बारे में पूरी जानकारी जुटता है एवं बीमार और बूढ़े जानवर को अलग कर दिया जाता है|

स्वस्थ जानवरो को २४ घंटे खड़ा रखा जाता है| जो जानवर बैठ जाते है उन्हें भी अलग कर दिया जाता है| तंदरुस्त जानवरो को स्लॉगटरिंग के लिए ले जाया जाता है| स्लॉगटरिंग के बाद जानवर को स्वचालित मशीनो के द्वारा खाल से अलग कर लिया जाता है| फिर बचे हुए जानवर को चार भागो में विभाजित कर के मीट फैक्ट्री को भेज दिए जाता है| मीट फैक्ट्री में हड्डियों को अलग किया जाता है एवं खाने योग्य मीट को पैक कर दिए जाता है| हड्डियों को कारकस प्लांट में भेज दिया जाता है एवं स्किन को टैनरीज में मार्केटेबल चमड़ा बनाने के लिए भेज दिया जाता है| मीट को पैक करने के लिए मल्टीलेयर फिल्म को प्रयुक्त किया जाता है| हड्डियों में से मीट को अलग करने की पूरी प्रक्रिया ४-८ डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर की जाती है| इतने कम तापमान पर सुक्ष्म जीवाणु नहीं पनपते है और मीट खाने लायक बना रहता है|

आयल मिल:

आयल मिल में विभिन प्रकार के तेलिय बेज को प्रोसेस करते है| ज्यादातर बीजो में तेल का कुछ अंश अवश्य होता है परन्तु कुछ बीजो में तेल की मात्रा ज्यादा होती है| इन बीजो को प्रोसेस कर के खाद्य तेल बनाया जाता है| इनमे कुछ इस प्रकार है|

  •  सोयाबीन
  •  मुफ्फली
  •  सरसो
  •  ओलिव
  •  बादाम
  •  सूर्य मुखी
  •  सीसम
  •  सफोला
  •  रेपसीड

इस प्रक्रिया में पहले तेलीय बीजो को मशीन से साफ़ किया जाता है| इसके बाद बीजो को क्रश कर के एक्सपेलर के द्वारा तेल निकला जाता है| एक्सपेलर से निकले हुए बीजो का जो भी केक बचता है उसे प्रेस में डाल कर फ्लेक्स में बदल देते है| फिर इसमें से सॉल्वैंट एक्सट्रैक्शन प्रक्रिया से बचा हुआ तेल निकल लिया जाता है|

सॉल्वैंट एक्सट्रैक्शन के लिए सॉल्वैंट के रूप में हेक्सेन का प्रयोग किया जाता है| हेक्सेन और तेल के मिश्रण को डिस्टिलेशन पद्दति से अलग कर लिया जाता है| हेक्सेन वापस प्रयोग कर ली जाती है और अलग किया हुए तेल को ब्लीच किया जाता है| ब्लीच करने के उपरांत तेल में से गंध निकल दी जाती है और पैक कर के बाजार में भेज दिया जाता है| इस तेल को रिफाइंड तेल कहा जाता है| एक्सपेलर से निकले हुए तेल में को भी ब्लीच एवं गंध मुक्त कर के बाजार में बेच बेच दिया जाता है| एक्सपेलर से निकले हुए तेल को कच्ची घनी तेल कहते है जिसमे ब्लीच और गंधमुक्त करने की प्रक्रिया नहीं की जाती है|

आलू के चिप्स:

आलू के चिप्स के लिए विशेष किस्म के आलू प्रयुक्त होते है इसके लिए कई कंपनी वाले कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करते है जिससे उनकी क्वालिटी एक सामान रहती है| छोटी कंपनियों वाले अच्छे किस्म के आलू लेकर उनसे आलू के चिप्स बनाते है| इस प्रक्रिया में पहले आलू को धोया जाता है जिससे उसपे लगी मिटटी निकल जाती है| फिर उसकी मशीन में डाल कर उसका छिलका उतारा जाता है| छिलका उतरने के बाद स्वचालित मशीन से चिप्स में काट देते है| चिप्स को लगातार तलने वाली मशीन में तला जाता है फिर उसमे से तेल को निथार कर उसपर स्वचालित मशीन से मसलो का छिड़काव किया जाता है और बिना अद्राता की हवा के साथ पैक कर दिए जाता है | ड्राई एयर की वजह से कुरकुरापन बना रहता है और चिप्स की शेल्फ लाइफ भी बढ़ जाती है| चिप्स बनाने में जो मसाले प्रयुक्त होते है| वह हर कंपनी के अपने फॉर्मूले होते है जो की चिप्स को एक अलग स्वाद प्रदान करते है|  मसलो में नमक, काली मिर्च, लाल मिर्च एवं कई अन्य प्रोपेरिओटोरी मसाले होते है|

गोवेर्मेंट रूल्स:

फ़ूड इंडस्ट्री के लिए सकरी नियम बहुत सख्त नहीं है पर HACCP एवं FASSI के नियमो का पालन आवश्यक है| अन्तर्राष्ट्र्य नियमो के अनुसार खाने की चीज़ो में हैवी मेटल जैसे लेड, क्रोम , असेक्निक, एंटीमनी एक प्रयुक्त मात्रा से ज्यादा नहीं होनी चाहिए| लेड, क्रोम , असेक्निक, एंटीमनी का ज्यादातर सोर्स पानी या फसलों में प्रयुक्त होने वाले कीटनाशक होते है| अभी हल में नेस्ले को अपनी बहुत बड़ी मात्रा में मेग्गी को जलना पढ़ा| इससे पूर्व कोकोकोला एवं पेप्सी में कीटनाशक कई गुना मिलने से भरी नुक्सान उठाना पढ़ा| इसलिए कोई भी उपक्रम  चालू करने के पूर्ण अपने कच्चे मॉल एवं पानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए|

इंडस्ट्री के नियम:

किसी भी इंडस्ट्री को शुरू करने के पहले उस इंडस्ट्री पर लागु होने वाले नियमो को पूरी तरह सावधानी से पालन करे|

इंडस्ट्री चालू करने की शुरुवात जमीन खरीदने से होती है| माध्यम या छोटी इंडस्ट्री लगाने के लिए राजकीय नोटिफ़िएड इंडस्ट्रियल एरिया अच्छा  रहता है क्युकी वह बहुत साडी सुविधाएं आसानी से काम खरचे पर मिल जाती है| बड़ी फैक्ट्री के लिए जमीन खरीद कर उसका एन्ड उसे बदलवाना जरुरी होता है| जमीन को इंडस्ट्रियल युस के लिए कन्वर्ट करना पढता है| इंडस्ट्री लगाने के लिए पानी के लिए सेंट्रल वाटर बोर्ड से अनुमति लेनी होती है| बिजली अपनी फैक्ट्री तक लेन के लिए बिजली की सप्लाई लाइन डालनी होती है| फैक्ट्री में बायलर एंड सेफ्टी इंस्पेक्टर का लइसेंस लगता है एवं प्रदुषण नियन्त्र मंडल से अनापत्ति पत्र लेना होता है| अगर फैक्ट्री में १० से ज्यादा कर्मचारी है तो ESI  PF में पंजीकरण करना होता है| इन सभी नियमो का पालन करना अति आवश्यक है|

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निष्कर्ष

फ़ूड टेक्नोलॉजी तेज़ी से बढ़ता हुए फिल्ड है जिसके अंतर्गत सभी तरह की फ़ूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजीज आती है| इसमें लगने वाली यूनिट तकरीबन एक करोड़ से कई करोड़ तक हो सकती है| इनको सौ मीटर से कई हज़ार मीटर तक जमीन पर लगाया जाता है| फ़ूड टेक्नोलॉजी फ़ूड साइंस का एक हिस्सा है जो की छटनी संरक्षानता पैकेजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के बारे मैं बताती है| फ़ूड टेक्नोलॉजी का महत्वत इसलिए है क्युकी इसके द्वारा खाद्य पदार्थ पूर्ण रूप से सुरक्षित एवं पोषहारित पूर्ण खाद्य पदार्थ बनाने में सहायक होती है| इसमें फ़ूड इंजीनियरिंग, माइक्रोबायोलॉजी एवं फ़ूड केमिस्ट्री का समावेश है|


Reference

Norman N. Potter and Josheph H. Hotchkiss  ,(2007), 5rd Edition, CBS Publishers and distributors , New York

 Ministry of Food Processing Industries (MoFPI), Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA), Media reports and Press Releases, Department of Industrial Policy and Promotion (DIPP), Press Information Bureau (PIB), Confederation of Indian Industries (CII), Union Budget 2016-17, Union Budget 2017-18

Hall, Carl W (2014), College of Engineering, Washington State University, Pullman, Washington, https://www.accessscience.com/content/dairy-machinery/179900

Processing Edible Oils,(2017) OILSEED FACT SHEET, Penn State College of Agricultural Sciences research and extension programs are funded in part by Pennsylvania counties, the Commonwealth of Pennsylvania, and the U.S. Department of Agriculture.

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